हमारे देश में क्या हो रहा है ? हमारा देश मुसलमानों के रहमो करम पर क्यों टिका है ? देश की राजनीति में हिन्दू का कोई औचित्य है भी या नहीं जब से पैदा हुआ तभी से यही देखता रहा हूँ की हमारी सियासत पूरी तरह से धर्म के जंजीर में जकड़ी पड़ी है | जनता एक बार अपने धर्म को परे कर भाईचारा और अमन के लिए सोच भी ले ते नेताओ की मण्डली को रास नहीं आता , उनके शब्दों का वार इतना जहरीला और घिनौना होता है की मिट रहे फासले फिर से मिलो दूर चले जाते है |
कुछ दिनों से उठ रहे मुद्दे को को ही देखा जाए तो लगता है की हम कौन सी दुनिया में है ?आज हर कोई मुँह उठा कर बोल रहा है टोपी पहनने से किसी का धर्म , मजहब पर आंच नहीं आता है , किसी की खुशिया नहीं छीन जाती है क्या हमारे देश में धर्म निरपेक्षता के मायने टोपी टिका लुंगी धोती से ही सिद्ध होता है ? क्या इन सब से ऊपर उठ कर देश के लिए अच्छे काम, विकास और सबके लिए न्याय इनसे धर्मनिरपेक्षता सिद्ध नहीं होता है ? भारत में ऐसी कोण सी सुविधा है जो मुस्लमान को नहीं मिलता है जो हिन्दुओ को मिल रहा है असलियत तो ये है माइनॉरिटी ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर फायदा तो इन्हें ही सबसे ज्यादा दिया जा रहा है फिर भी हमारे नेता क्यों हिन्दू और मुस्लमान की ही राजनीति में अपना भविष्य देखते है ? अगर हम माइनॉरिटी की बात करे तो सिख इसाई जैन बौद्ध इत्यादि भी आते है ये तो अमन चैन की जिन्दगी जी रहे है इन्हें तो कोई शिकायत नहीं इनके नाम पर कोई राजनीति नहीं तो सिर्फ मुस्लिम के लिए ही नेताओ का ये ढकोसला क्यों ??
क्यों हमारे देश के लोगो की सोच छोटी होती जा रही है ? हमे या समझ नहीं आता है की कोई मुस्लमान ये कहे को वो मुसलमान है कोई सिख कहे की वो सिख है तो ये सब धर्म निरपेक्ष ही रहते है लेकिन कोई कह दे की मै हिन्दू हूँ हिन्दू राष्ट्रवादी हूँ तो फिर सांप्रदायिक कैसे हो जाते है हिन्दू ??
अगर हिन्दू टोपी न पहने तो सांप्रदायिक गले न लगे तो सांप्रदायिक ? तो हम वोट पर जिन्दगी जीने वालो से पूछना चाहूँगा की कितने मुस्लमान को अपने देखा है को वो टिका लगा कर धोती कुरता पहन कर मंदिर चले गए कितनो ने आकर पैर छू लिया ? अगर वो ये सब नहीं करते है तो क्यों नहीं आप इन मुद्दों को उठाते है ? क्या हिन्दुओ के देश में हिन्दू होना गुनाह है ? जब मुस्लिम अपने उसूलो से सौदा नहीं करते है फिर भी धर्मनिरपेक्ष कहला सकते है तो हिन्दुओ के लिए ये अपराध और साम्प्रदायिकता जैसा शब्द क्यों ?
हे मेरे देश के नागरिक जागो और इन सब से ऊपर उठो याद करो अकबर को जिन्होंने दिन-इ इलाही की शुरुआत की थी उसने सबसे बड़ा इंसानियत का धर्म अपनाया था तो आप भी जाति धर्म से ऊपर इंसानियत का धर्म अपनाओ और देश के विकास में सच्चा भागीदार बनो और इन बड़े बोल वचन दने वाले नेताओ को मुह तोड़ जवाब दो तभी इस देश का भला होगा नहीं तो हम फिर से वही रह जाएँगे जहा हमे अंग्रेजो ने बांध रखा था और हम २०० साल तक मजहब के नाम पर खुद ही बर्बाद होते रहे और जब अक्ल आई तो ये मजहबी कीड़ा हर भारतवासी के नस नस में घुस चूका था जिसका असर आज तक हो रहा है हम आपस में लड़ते है और हमारे आका आग में घी डाल कर मजे से राज कर रहे है
जागो देशवासियों अब समय आ चुका है हम अपने आजादी दिवस के बहुत करीब है कुछ तो नया इतिहास बनाओ नए भारत का सपना तो पूरा करो | जय हिन्द जय भारत








