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शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

क्या हर धर्म से ऊपर इंसानियत का धर्म नहीं हो सकता ?

क्या हर धर्म से ऊपर इंसानियत का धर्म नहीं हो सकता ?
हमारे देश में क्या हो रहा है ? हमारा देश मुसलमानों के रहमो करम पर क्यों टिका है ? देश की राजनीति में हिन्दू का कोई औचित्य है भी या नहीं जब से पैदा हुआ तभी से यही देखता रहा हूँ की हमारी सियासत पूरी तरह से धर्म के जंजीर में जकड़ी पड़ी है | जनता एक बार अपने धर्म को परे कर भाईचारा  और अमन के लिए सोच भी ले ते नेताओ की मण्डली  को रास नहीं आता , उनके शब्दों का वार इतना जहरीला  और घिनौना होता है की मिट रहे फासले  फिर से मिलो दूर चले जाते है |
कुछ दिनों से उठ रहे मुद्दे को को ही देखा जाए तो लगता है की हम कौन  सी दुनिया में है ?आज हर कोई मुँह  उठा कर बोल रहा है टोपी पहनने से किसी का धर्म , मजहब पर आंच नहीं आता है , किसी की खुशिया नहीं छीन जाती है  क्या  हमारे  देश में धर्म निरपेक्षता के मायने टोपी टिका  लुंगी धोती से ही सिद्ध होता है ? क्या इन सब से ऊपर उठ कर देश के लिए  अच्छे काम, विकास  और सबके लिए न्याय इनसे धर्मनिरपेक्षता सिद्ध नहीं होता है ? भारत में ऐसी कोण सी सुविधा है जो मुस्लमान को नहीं मिलता है जो हिन्दुओ को मिल रहा है असलियत तो ये है माइनॉरिटी ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर फायदा तो इन्हें ही सबसे ज्यादा दिया जा रहा है  फिर भी हमारे नेता क्यों हिन्दू और मुस्लमान की ही राजनीति में अपना भविष्य देखते है ? अगर हम माइनॉरिटी की बात करे तो सिख इसाई जैन बौद्ध इत्यादि भी आते है ये तो अमन चैन की जिन्दगी जी रहे है इन्हें तो कोई शिकायत नहीं इनके नाम पर कोई राजनीति नहीं तो सिर्फ मुस्लिम के लिए ही नेताओ का ये ढकोसला क्यों ??
क्यों हमारे देश के लोगो की सोच छोटी होती जा रही है ? हमे या समझ नहीं आता है की कोई मुस्लमान ये कहे को वो मुसलमान है  कोई सिख कहे की वो सिख है तो ये सब धर्म निरपेक्ष ही रहते है लेकिन कोई कह दे की मै हिन्दू हूँ  हिन्दू राष्ट्रवादी  हूँ तो फिर सांप्रदायिक कैसे हो जाते है हिन्दू ??
अगर हिन्दू टोपी न पहने तो सांप्रदायिक गले न लगे तो सांप्रदायिक ? तो हम वोट पर जिन्दगी जीने वालो से पूछना चाहूँगा की कितने मुस्लमान को अपने देखा है को वो टिका लगा कर धोती कुरता पहन कर मंदिर चले गए कितनो ने आकर पैर छू लिया ? अगर वो ये सब नहीं करते है तो क्यों नहीं आप इन मुद्दों को उठाते है ? क्या हिन्दुओ के देश में हिन्दू होना गुनाह है ? जब मुस्लिम अपने उसूलो से सौदा नहीं करते है फिर भी धर्मनिरपेक्ष कहला सकते है तो हिन्दुओ के लिए ये अपराध और साम्प्रदायिकता जैसा शब्द क्यों ?
हे मेरे देश के नागरिक जागो और इन सब से ऊपर उठो याद करो अकबर को जिन्होंने दिन-इ इलाही की शुरुआत की थी उसने सबसे बड़ा  इंसानियत का धर्म अपनाया था तो आप भी  जाति धर्म  से ऊपर इंसानियत का धर्म अपनाओ और देश के विकास   में सच्चा भागीदार बनो और इन बड़े  बोल वचन दने वाले नेताओ को मुह तोड़ जवाब दो तभी इस देश का भला होगा नहीं तो हम फिर से वही रह जाएँगे जहा हमे अंग्रेजो ने बांध  रखा था और हम २०० साल तक मजहब के नाम पर खुद ही बर्बाद होते रहे और जब अक्ल आई तो ये मजहबी कीड़ा हर भारतवासी के नस नस में घुस चूका था जिसका असर आज तक हो रहा है हम आपस में लड़ते है और हमारे आका आग में घी डाल कर मजे से राज कर रहे है
जागो देशवासियों अब समय आ चुका है हम अपने आजादी दिवस के बहुत करीब है कुछ तो नया इतिहास बनाओ नए भारत का सपना तो पूरा करो | जय हिन्द जय भारत

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

दोस्ती के नाम पर दगा और अमन के नाम पर बेशर्मी तो पाकिस्तान की फितरत बन चुकी है

आखिर और कितनी क़ुर्बानी देखते रहेंगे हम ? दोस्ती के नाम पर दगा और अमन के नाम पर बेशर्मी से भरी कायराना करतूत पाकिस्तान की तो फितरत बन चुकी है | हमारे देश के हुक्मरान बस अपनी हिम्मत बयानबाजी तक ही
सिमित रखते है , चाहे कितने ही निर्दोष सैनिक अपनी जान की आहुति देते रहे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है | कप्तान कालिया, सुधाकर सिंह हेमराज के बाद फिर से ५ सैनिक की निर्मम हत्या कर दी गयी है और हम है की सबसे ताकतवर होने का खोखला दम भरते रहते है | जरा सोचिए उन मासूमो का क्या होगा जिसने अपना पिता भाई और पति खोया है कौन  बनेगा उनका सहारा ? हमारी  सरकार तो ५लाख में उनके जान की कीमत लगा देती है लेकिन करोरो अरबो रूपए उन्हें लुटा देती है जो देश के लिए बैट- बाउल  से खेलते है | आखिर हमारी बेशर्म सरकार को तो देशभक्ति क़ुर्बानी में नहीं बैट -बाउल में दिखने लगी है | एक कमजोर  शासन 
  ने भारत जैसे महान देश की गरिमा को कलंकित कर के रख दिया है | 
 हर बार पाकिस्तान चाइना जैसे देश हमारे यहाँ शान से सेंधमारी कर जाता है और हम बेबस देखते रहते है | नवाज शरीफ को देख कर बस कारगिल युद्ध की ही स्मृति ताज़ा हो उठती है कही फिर से युद्ध की ही साजिश तो नहीं की जा रही है ? अगर ऐसा है तो शांति के लिए युद्ध भी आवश्यक हो गया है |

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

इंसानियत और कानून दोनों को मरते देखा है

आज एक बार फिर से इंसानियत और कानून दोनों को मरते देखा है, क्या दिल्ली को बलात्कारियो का शहर कहना सही नहीं होगा ? दरिंदगी अपने चरम पर है ये हाल सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बाकि जगह का भी है. पुलिस वाले केस को रफा दफा
करने की बात करते है और विरोध जताने आई महिला को  थप्पड़ मारते है  ! ये इंसानियत और कानून की मौत नहीं तो और क्या है ? हमारी सरकार से तो उम्मीद रखना ही  बेकार है, सांत्वना व्यक्त कर देने से अगर ऐसे हैवान ख़त्म हो जाए तो विरोध की जगह हर कोई सांत्वना ही व्यक्त करेगा !   ऐसी पुलिस  और सरकार जब तक रहेगी देश में ये हैवान लाख कड़े कानून को ताक़ पर रख कर ये अंजाम देते रहेंगे ! 
देश की अस्मिता हाशिये पर खरी है, देश की अस्मिता लूटती जा रही है और रखवाले अपनी राजनीती में लगे हुए है ! जब  तक  दरिंदो  की  सोच  और  मानसिकता  को  बदला नहीं   जाएगा  और  हमारी  व्यवस्था  कागज   कलम  से  उठ  कर  हकीक़त  वाले  प्रयोग  में  नहीं  आएगी . तब  तक  ये रुकना  अब  तो  नामुमकिन  लगता  है !
अब सवाल ये है की इन मासूम और निर्दोष महिला लड़की और बच्ची का हिफाजत कैसे हो ?? देश के माथे पर कलंक है अगर हमारी सरकार इन सब चीजों को रोकने में  नाकाम रहती है ! क्या है कोई ऐसा नुस्खा जिस से कानून का डर लोगो में हो और दरिंदो की मानसिकता को बदल कर उन्हें फिर से इन्सान बनाया जा सके ?  दुबई का फैसला ही इन सब में ज्यादा कारगर सिद्ध होता है . न  रहेगा  बांस  न  बजेगी  बासुरी  और  जब बांस छीन  जाने  का  डर  पैदा  होगा  फिर  मानसिकता  भी   बदलनी  सुरु  हो  जाएगी  :( :( :( :(
रणजीत

रविवार, 14 अप्रैल 2013

आखिर नितीश कुमार को हो क्या गया है ?


आखिर नितीश कुमार को हो क्या गया है ? वो देश के विकास की बात करते है लेकिन उनके भाषण में देश की राजनीती कम व्यक्तिगत  राजनीती ज्यादा दिखाई दे रही है ! जब भी उन्हें बड़ा  मंच मिला है बोलने का वो विकास से व्यंग्य की तरफ बढ़ जाते है आखिर वो अपनी मुस्लिम वोट की राजनीती के लिए किसी को दोषी क्यू ठहरा रहे है ? यहाँ किसी से का मतलब नरेन्द्र मोदी से है, मै हमेशा नरेन्द्र मोदी का भाषण सुनता हूँ मैंने आज तक नहीं  सुना  की वो कभी भी इस तरह की टिप्पणी करते दिखे हो ! नितीश  कुमार ने नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलने से कभी भी पीछे नहीं हटे जब भी मौका मिला वो बोल बैठे जैसे बिहार में बाढ़ राहत कोष का फण्ड हो या बिहार में चुनाव रैली की बात हो या सध्भावाना रैली की बात हो हर मुद्दे पर नितीश कुमार कटे कटे से नजर आए  आखिर नरेन्द्र मोदी से ऐसी नफरत क्यों ?अगर ऐसा ही है तो वो आडवाणी जैसे नेता पर कुछ क्यों नहीं बोलते वो भी तो बाबरी मस्जिद कांड के दोषी है ?  और आज के भाषण में तो हद हो गई देश के विकास  की जगह वो तुलनात्मक और व्यक्तिगत ज्यादा नजर आए . कुछ शब्द जैसे कुपोषण भी हो और विकास
की भी बात करे पानी की दिक्कत भी हो और विकास की भी बात करे हवा बनाने  से देश नहीं चलता, टोपी और टिका भी लगाना पड़ता है रामलीला में हम भी रैली कर के दिखाए है   इत्यादि बहुत से ऐसे शब्द थे जिनकी कोई जरुरत नहीं थी  इस भाषण का साफ साफ मतलब है की वो अपनी एहमियत पार्टी को दिखा रहे है अगर मोदी को बीजेपी ने आगे किया तो वो पीछे हो जाएँगे इसके लिए तो उन्होंने 8 महीने की मोहलत तक दे डाली है बीजेपी को की अपना उम्मीदवार घोषित करे !
अब हम जरा मोदी जी के भाषण की बात करे तो उन्होंने बस विकास  और विकास  की बात कही  उन्होंने य भी कहा की कांग्रेस के बने गड्ढों को मैंने अभी बस भरा है और विकास तो अभी हो रहा है और चलता रहेगा  उन्होंने ये कहा की गुजरात का विकास मोडल बिहार में लागु हो सकता ह लेकिन एक बदलाव के साथ मॉडिफिकेशन के साथ मोदी फिकेशन के साथ नहीं ! और उनके तर्क किसान से लेकर उद्योगपति तक को पसंद आए है देश की जनता भी उन्हें स्वीकार कर रही है ! और जहा तक उनके तल्ख़ तिप्पन्नियो का सवाल है वो अपने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए रही है और जो जायज भी है क्योकि कांग्रेस के ५० साल के शासन का रिजल्ट दुनिया देख रही है और बस मोदी उनके इन्ही बातो पर अपनी बात कहते है वो कभी भी पर्सनल नहीं हुए न ही कांग्रेस के लिए न ही अपनी पार्टी के लिए. यह के अच्छे नेता के संस्कार और गुण होते है !
लेकिन नितीश कुमार हमेशा से अपनी ही पार्टी  को चेतवानी और नरेन्द्र मोदी पर निशान साधते दिखे है, मतलब ये की जिस पत्तल में भोजन है  छेद भी उसी में कर रहे है , उनका यह तेवड किसी भी  कोण से सही नहीं है न ही देश के लिए और न ही पार्टी के लिए. हां कांग्रेस को फायदा  जरुर मिल रहा होगा इस गृह युद्ध का मजा लेने का !
इसलिए जितनी जल्दी हो सके यह सब किस्सा बंद करना परेगा नहीं तो आगे बीजेपी को ही नुकसान झेलना पड़ सकता है  !
रणजीत

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

प्यार की सोच



दोस्तों आज हम जरा प्यार की बाते करते है ज्यादा नहीं थोडा  सा ही करेंगे - हर किसी का प्यार को लेकर अपना विचार होता है जो होना भी चाहिए और सही भी है ! कहते है की प्यार एक एहसास है इसमें उत्साह की मिठास है, गम इसका पहरेदार है , दर्द इसका जोड़ीदार है , और जिसे दर्द का एहसास है प्यार उसी के पास है ! प्यार जब होता है तो अचानक से सबकुछ रंगीन लगने लगता है हर पल एक ही ख्याल और एक ही ख्वाब वो कैसा होगा /होगी और उसके अच्छे अच्छे सपने उस से मिलने की बेचैनी,  उसके गोद में सर रख कर सुख दुःख कहने की दिल से इच्छा ! मतलब एक अपनापन सा एहसास का हो जाना ये सब प्यार के ही तो इशारे है !
                            अब जरा कुछ बातो को सोचिए आपको कोई अच्छा लगता है /लगती है ! आपने  उस से दोस्ती की कुछ दिन की बाते और आपको सबकुछ अच्छा और मीठा मीठा लगने लगता है आपने  सपने देखने शुरू कर दिए, अब बातो में थोडा रोमांस और मजाक का भी सिलसिला शुरू होता है बाते ऐसी होती है जो कभी दिल को गुदगुदाती है तो कभी  दिल को छू जाती है आप अच्छे से उस से जुड़ने  लगते है अब आप उसे हमेशा मिस करने लगते है  शायद ये प्यार ही है और आपके सपने बरक़रार है अभी तक, लेकिन फिर से सोचिए वो पल कैसा होगा जब आपको एक शानदार और जानदार झटका लगे आपने जिसे चाहा उसके प्यार में दिल की जगह अब दिमाग ने जगह ले लिया हो , भावनाओ और एहसास की जगह उसकी तीखी और कडवी बातो ने जगह ले लिया हो, आपको ऐसा सवाल सुन ने को मिलने लगे की ये साबित करो की तुम मेरे से प्यार करते हो , अगर नहीं कर पाए तो इसे  मात्र एक आकर्षण का नाम दिया जाएगा , मतलब ये की अब यहाँ प्यार में दिल नहीं दिमाग लगने लगा, अब प्यार प्यार नहीं एक पढाई लगने लगा क्योकि प्यार में एहसास जुड़ते है वो क्यों जुड़ते  है इसका पता नहीं चल पाता लेकिन जब साबित करने जैसी बात आ जाती है तो प्यार प्यार नहीं एक लेसन लगने लगता है  ! कभी कभी ये भी सुनने को मिल सकता है मेरे लिए प्यार बहुत स्पेशल है मै इसे अभी नहीं करना चाहती /चाहता ! लेकिन यह भी तो एक सच है खास और स्पेशल वो चीज़ होती है जिस से हम दिल से जुड़ते है उसका हमेशा ख्याल रखते है उसकी याद हमेशा आती है , किन्तु वो किताब स्पेशल कैसे हो सकती है जिसे हम कभी पढने की कोशिश ही न करे इस वजह से की ये मेरे लिए खास है और मै इसे अभी नहीं पढना चाहता /चाहती ! ये हास्यास्पद नहीं तो और क्या है ?
           मेरा मानना है की प्यार सिर्फ दिल से हो सकता है दिमाग से नहीं अगर हुआ तो बस एक नए रिश्ते कुछ पल के लिए जुड़ तो जाएँगे लेकिन इतने थियोरेम्स  आएँगे की जिन्दगी  प्रूव करने में ही बीत जाएगी और प्यार एवं रिश्तो का पंचनामा बनते देर नहीं लगेगी ! इसलिए प्यार कीजिए  तो खुश रहने के लिए और वो बस दिल से ही मिल सकता है दिमाग से नहीं !
रणजीत

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

बिहारी के 101 साल


बिहारी के १०१ साल
दोस्तों आज से १०१ साल पहले हम बिहारी नहीं बंगाली हुआ करते थे I २२ मार्च का दिन हम सभी १० करोड़ बिहारियों के लिए बहुत खास है हमारी एक पहचान बनी बिहारी  होने की पहचान I हमारा यह राज्य देश के भौगोलिक पटल पर बारहवी स्थान  रखता है I हमारे इस भूमि ने एक से एक महान लोगो को अपना नाम दिया है , गौतम बुद्ध,  महावीर, सीता ,जैसे महापुरुष और महादेवी यही हुए इसके अलावा वीर कुवंर सिंह, रामधारी सिंह दिनकर विद्यापति राजेंद्र प्रसाद  जैसे ऐसे अनेको नाम है जिनसे हमारे बिहार का नाम रौशन हुआ है I और क्रांतिकारियों के इतिहास में जय प्रकाश नारायण को भुला नहीं  जा सकता जिसकी वजह से हमे ढेर सारे राजनेता और समाजसेवी मिला I
लेकिन दुर्भाग्य हमारा हमे २००० इसवी में फिर से बाँट दिया गया और हमसे झारखण्ड अलग हो गया फिर भी  हम उसे अपना भाई ही समझते है I बरौनी रिफाइनरी जैसे उद्योग पुरे देश को तेल की सुविधा देता आ रहा है I
               हमारा बिहार शिक्षा के मामले में जरुर निम्न स्तर पर है लेकिन यह भी एक सत्य है की सिविल सेवा में सबसे ज्यादा सफलतम कैंडिडेट देने वाला राज्य भी बिहार ही है I
खैर ज्ञान की बाते तो होती ही रहेंगी आए हुम कुछ चर्चा अपने संस्कृति विविधताओं का भी कर ले -:
हम अपने मिथिला पेंटिंग को लेकर हमेशा से गर्व करते आ रहे है और करते रहेंगे , हमारा भोजपुरी रंग भी किसी  से छुपा नहीं है हम अपने त्यौहार की ख़ुशी पुरे दिल से मनाना जानते  है चाहे होली हो या दीवाली  दुर्गा पूजा हो या छठ पूजा हम हर पल को बखूबी और दिल से जीना जानते है I हमारा बिहार ही एक ऐसा राज्य है जहा हर जिला की अपनी विवधताओ से भरी भाषा है और सबसे मजेदार बात ये है की हम सब एक दुसरे की बातो को आसानी से समझ भी लेते है I बिहार में भारत का हर रंग है
                                                                                                     B- BHARAT
                                                                                                     I-  INDIA
                                                                                                     H- HINDUSTAAN
                                                                                                     A- ARYAVART
                                                                                                     R- REVA
और आज का वक़्त है तो बस ख़ुशी मनाने का क्योकि हमारा अस्तित्व भी आज ही के दिन बना है यानि होली के आसपास इसलिए हमारा राज्य अनेक प्रकार के रंगों से भरा है तो आइए हम पने राज्य के उज्वल भविष्य की कामना करें और लगन से मेहनत करें ताकि हमारा राज्य हर मामले में सबसे आगे जाए और दुनिया में अपना परचम लहराए I
जय बिहार
रणजीत

गुरुवार, 21 मार्च 2013

होली में सियासी रंग



होली में सियासी रंग
होली की रंग में जहां एक तरफ हम रंगों से खेलने का मन बना बैठे है वही दूसरी तरफ शुरू  हो चूका है सियासत का गहरा रंग |जी हाँ हम बात कर रहे है अचानक से हुई इस राजनितिक उथल पुथल की , बैसाखी के सहारे चलने वाली इस कांग्रेस सरकार की बैसाखी हिलती और छिनती नजर आ रही है | डी.म.के. प्रमुख करूणानिधि के नए पैतरे  ने राजनीती में एक नया रंग डाल दिया है, तमिल मुद्दे को लेकर समर्थन वापसी का एलान कर चुके करूणानिधि ने सरकार को सकते में डाल दिया है | इस सदमे को झेल रही सरकार के लिए एक और झटका तब लगा जब बहार से समर्थन दे रही मुलायम सिंह जी की पार्टी ने कांग्रस के मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बयान को लेकर बेनी प्रसाद से इस्तीफे की मांग कर दिया और उनकी बात नहीं मानने पर समर्थन वापसी की धमकी भी दे  डाली है | गौरतलब है की बेनी बाबु ने मुलायम सिंह जी को लुटेरा और आतंकवादी  जैसे शब्दों से अलंकृत कर दिया  था , और इसी बात से चुप्पी साढ़े मुलायम ने अचनक मौके को भांप कर एक नया सियासी रंग डाल दिया |
             जुगार वाली कांग्रेस सरकार के लिए अब सर दर्द जैसी स्थिति  दिखाई दे रही है. और सरकार ने जुगार वाला अपना काम  शुरू  भी  कर दिया है, श्रीमती सोनिया गाँधी मुलायम सिंह के सामने हाथ जोड़ते नजर आ रही थी की शायद मुलायम सिंह ही बेडा पाड़ लगा दे | और राजनीती के माहिर मुलायम सिंह इस बात को अच्छे तरीके से समझ चुके है की कांग्रेस सरकार पहले ही ममता बनर्जी का साथ खो चुकी है और अब करूणानिधि भी  कन्नी काटते नजर आ रहे है तो  उन की भूमिका महत्वपूर्ण    हो गई है |
बसपा की मायावती ने कांग्रेस को  समर्थन दिए रखने का भरोसा देकर अपाहिज होने से बचाने  की  उम्मीद और कोशिश जारी  रखी है   क्योकि मायावती को हमेशा सीबीआई का खौफ दिखाया जाता रहा है और सरकार का यही एक मजबूत और जबरदस्ती वाला तरीका है अपनी बात मनवाने का |
और आज की सुबह हुआ भी वही करूणानिधि के बेटे के यहाँ सीबीआई की छापेमारी ने यह साबित कर दिया है की समर्थन वापस लेने पर क्या क्या नुकसान झेलना पर सकता है करूणानिधि जी को और साथ ही साथ यह एक चेतावनी भी लगती है मुलायमसिंह जी और मायावती जी के लिए |
इतने घोटाले और भ्रस्ताचार के बाद कांग्रेस की जो साख गिरी है उसे बचनेके लिए और अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए ये लंगरी सरकार किसी  भी  हद तक जा सकती है |
कभी कभी राहत देने वाली बात ये नजर आती है की जेद्यु सरीखी पार्टिया जो बीजेपी की सहयोगी पार्टी है कांग्रेस का दामन बचाने जैसे इशारे करती नजर आती है , खैर जो भी हो जोड़ जुगार जारी है देखते है की डूबता हुआ जहाज को  कौन तिनके की सहारा  देता है या सरकार एक गहरी और अंतिम दुबकी लगाने के कगार पर है ? फैसला जो भी हो लेकिन मार  तो जनता ही खाती है इन सियासी रंगों का | आइए हम सब अपनी होली खेले और राजनीती में भी  सियासी रंग चढ़ने दे और टकटकी लगाए इंतजार करे |
जय भारत
रणजीत

रविवार, 17 मार्च 2013

बिहार की अधिकार यात्रा


बिहार की अधिकार  यात्रा है  कल  देश  की  राजधानी  नयी  डेल्ही  में . लाखो  लोग  जोश  के  साथ  इस  यात्रा  में  शामिल  हो  रहे  है . डेल्ही  के   रामलीला  मैदान  में  अच्छी   तैयारी  की  गई  है . बिहार  भवन  खचाखच  भरा  हुआ  है  . मुद्दा  है  बिहार  को  विशेष  राज्य  का  दर्जा  दिया  जाए . हम  सब  इस  मुद्दे  पर  साथ  है . लेकिन  साथ  ही  सुरु  हो  गई  है  राजनीती  का  खेल . गौर  करने  वाली  बात  ये  है   की  बिहार  की  अधिकार  यात्रा  सब  की  है  . फिर  नितीश  कुमार  ही  क्यू ? सिर्फ  जदयू  ही  क्यू ? आखिर  बीजेपी  भी  तो  उनकी  सहयोगी  पार्टी  है  तो  वो  इस  यात्रा  में  क्यू  शामिल  नही   हुए ? जब  बिहार  के  अधिकार  की  बात  है  तो   कांग्रेस  राजद  जैसी  पार्टिया  भी  आगे  आनी  चाहिए  थी  लेकिन  बिहारियों  की  भीड़   को  जदयू  का  ही  पैजामा  पहना  कर  डेल्ही  लाया  जा  रहा  है . क्या  नितीश  कुमार  अपनी  शक्ति  प्रदर्शन  कर  रहे  है ?  क्या  वो  नरेन्द्र  मोदी  को  चुनौती  दे  रहे  है  ? बिहार  की   या  ये  कहे  की  जदयू  की  रैली  की  शोर  और  हलचल  को  देख  कर  क्या  बीजेपी  में  सबकुछ  ठीक  चल  रहा  होगा  ?
मुद्दा  विकास   का  है   और  हम  बिहारी  सब  एक  जुट  है  क्या  यही  एक  मात्र  सच  है ? जी  नहीं  दूसरी  तरफ  का सच  कुछ  और  ही  है  जहा  बिहार  के  विशेष  राज्य  का  दर्जा  मांगने  वालो  की  भीड़ है  वही उस भीड़ में  कुछ  मुट्ठी  भर  लोग  एक  नए राज्य  की  भी  मांग  कर  रहे  है . मिथिला  रज्य . इस  वजह  से  इस  अधिकार  यात्रा  का  बहिष्कार  करने  की  भी  तैयारी  है  . सवाल  ये  है  की  क्या  बिहार  में  मिथिलांचल  के  लोगो  की  उपेक्षा  हो  रही है  ? आखिर  पिछड़े   हुए  बिहार  को   टुकरे  कर  के  और  पिछड़ा    क्यू  कर  रहे  है ? क्या  मिथिला  राज्य  बन  जाने  से  मिथिला - डेल्ही  बन  जाएगी  या  विकाश  के  रास्ते   पर  दौर  परेगी  ? जी  नहीं  बिहार  और  भी  पीछे,   और  मिथिला  एक  पेड़  से  कट  कर  एक  छोटा  सा  पौधा  मात्र  रह  जाएगा  जिसका  विकास   होना  उतना  ही  मुश्किल  होगा  जितना  कछुए  के  लिए  बहुत  तेज  दौर  पाना .
लेकिन  कल  का  वक़्त  है  तो  बस  अपने  नए  सपनो  के  बिहार  को  हकीक़त  में  बदलने  के  लिए  एक  जोरदार  संघर्ष की , जिसमे  हम  सभी  बिहारियों  को  साथ  होना  चाहिए .
जय  बिहार
रणजीत