बिहार की अधिकार यात्रा है कल देश की राजधानी नयी डेल्ही में . लाखो लोग जोश के साथ इस यात्रा में शामिल हो रहे है . डेल्ही के रामलीला मैदान में अच्छी तैयारी की गई है . बिहार भवन खचाखच भरा हुआ है . मुद्दा है बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए . हम सब इस मुद्दे पर साथ है . लेकिन साथ ही सुरु हो गई है राजनीती का खेल . गौर करने वाली बात ये है की बिहार की अधिकार यात्रा सब की है . फिर नितीश कुमार ही क्यू ? सिर्फ जदयू ही क्यू ? आखिर बीजेपी भी तो उनकी सहयोगी पार्टी है तो वो इस यात्रा में क्यू शामिल नही हुए ? जब बिहार के अधिकार की बात है तो कांग्रेस राजद जैसी पार्टिया भी आगे आनी चाहिए थी लेकिन बिहारियों की भीड़ को जदयू का ही पैजामा पहना कर डेल्ही लाया जा रहा है . क्या नितीश कुमार अपनी शक्ति प्रदर्शन कर रहे है ? क्या वो नरेन्द्र मोदी को चुनौती दे रहे है ? बिहार की या ये कहे की जदयू की रैली की शोर और हलचल को देख कर क्या बीजेपी में सबकुछ ठीक चल रहा होगा ?मुद्दा विकास का है और हम बिहारी सब एक जुट है क्या यही एक मात्र सच है ? जी नहीं दूसरी तरफ का सच कुछ और ही है जहा बिहार के विशेष राज्य का दर्जा मांगने वालो की भीड़ है वही उस भीड़ में कुछ मुट्ठी भर लोग एक नए राज्य की भी मांग कर रहे है . मिथिला रज्य . इस वजह से इस अधिकार यात्रा का बहिष्कार करने की भी तैयारी है . सवाल ये है की क्या बिहार में मिथिलांचल के लोगो की उपेक्षा हो रही है ? आखिर पिछड़े हुए बिहार को टुकरे कर के और पिछड़ा क्यू कर रहे है ? क्या मिथिला राज्य बन जाने से मिथिला - डेल्ही बन जाएगी या विकाश के रास्ते पर दौर परेगी ? जी नहीं बिहार और भी पीछे, और मिथिला एक पेड़ से कट कर एक छोटा सा पौधा मात्र रह जाएगा जिसका विकास होना उतना ही मुश्किल होगा जितना कछुए के लिए बहुत तेज दौर पाना .
लेकिन कल का वक़्त है तो बस अपने नए सपनो के बिहार को हकीक़त में बदलने के लिए एक जोरदार संघर्ष की , जिसमे हम सभी बिहारियों को साथ होना चाहिए .
जय बिहार
रणजीत
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें