आखिर नितीश कुमार को हो क्या गया है ? वो देश के विकास की बात करते है लेकिन उनके भाषण में देश की राजनीती कम व्यक्तिगत राजनीती ज्यादा दिखाई दे रही है ! जब भी उन्हें बड़ा मंच मिला है बोलने का वो विकास से व्यंग्य की तरफ बढ़ जाते है आखिर वो अपनी मुस्लिम वोट की राजनीती के लिए किसी को दोषी क्यू ठहरा रहे है ? यहाँ किसी से का मतलब नरेन्द्र मोदी से है, मै हमेशा नरेन्द्र मोदी का भाषण सुनता हूँ मैंने आज तक नहीं सुना की वो कभी भी इस तरह की टिप्पणी करते दिखे हो ! नितीश कुमार ने नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलने से कभी भी पीछे नहीं हटे जब भी मौका मिला वो बोल बैठे जैसे बिहार में बाढ़ राहत कोष का फण्ड हो या बिहार में चुनाव रैली की बात हो या सध्भावाना रैली की बात हो हर मुद्दे पर नितीश कुमार कटे कटे से नजर आए आखिर नरेन्द्र मोदी से ऐसी नफरत क्यों ?अगर ऐसा ही है तो वो आडवाणी जैसे नेता पर कुछ क्यों नहीं बोलते वो भी तो बाबरी मस्जिद कांड के दोषी है ? और आज के भाषण में तो हद हो गई देश के विकास की जगह वो तुलनात्मक और व्यक्तिगत ज्यादा नजर आए . कुछ शब्द जैसे कुपोषण भी हो और विकास
की भी बात करे पानी की दिक्कत भी हो और विकास की भी बात करे हवा बनाने से देश नहीं चलता, टोपी और टिका भी लगाना पड़ता है रामलीला में हम भी रैली कर के दिखाए है इत्यादि बहुत से ऐसे शब्द थे जिनकी कोई जरुरत नहीं थी इस भाषण का साफ साफ मतलब है की वो अपनी एहमियत पार्टी को दिखा रहे है अगर मोदी को बीजेपी ने आगे किया तो वो पीछे हो जाएँगे इसके लिए तो उन्होंने 8 महीने की मोहलत तक दे डाली है बीजेपी को की अपना उम्मीदवार घोषित करे !अब हम जरा मोदी जी के भाषण की बात करे तो उन्होंने बस विकास और विकास की बात कही उन्होंने य भी कहा की कांग्रेस के बने गड्ढों को मैंने अभी बस भरा है और विकास तो अभी हो रहा है और चलता रहेगा उन्होंने ये कहा की गुजरात का विकास मोडल बिहार में लागु हो सकता ह लेकिन एक बदलाव के साथ मॉडिफिकेशन के साथ मोदी फिकेशन के साथ नहीं ! और उनके तर्क किसान से लेकर उद्योगपति तक को पसंद आए है देश की जनता भी उन्हें स्वीकार कर रही है ! और जहा तक उनके तल्ख़ तिप्पन्नियो का सवाल है वो अपने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए रही है और जो जायज भी है क्योकि कांग्रेस के ५० साल के शासन का रिजल्ट दुनिया देख रही है और बस मोदी उनके इन्ही बातो पर अपनी बात कहते है वो कभी भी पर्सनल नहीं हुए न ही कांग्रेस के लिए न ही अपनी पार्टी के लिए. यह के अच्छे नेता के संस्कार और गुण होते है !
लेकिन नितीश कुमार हमेशा से अपनी ही पार्टी को चेतवानी और नरेन्द्र मोदी पर निशान साधते दिखे है, मतलब ये की जिस पत्तल में भोजन है छेद भी उसी में कर रहे है , उनका यह तेवड किसी भी कोण से सही नहीं है न ही देश के लिए और न ही पार्टी के लिए. हां कांग्रेस को फायदा जरुर मिल रहा होगा इस गृह युद्ध का मजा लेने का !
इसलिए जितनी जल्दी हो सके यह सब किस्सा बंद करना परेगा नहीं तो आगे बीजेपी को ही नुकसान झेलना पड़ सकता है !
रणजीत
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