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गुरुवार, 21 मार्च 2013

होली में सियासी रंग



होली में सियासी रंग
होली की रंग में जहां एक तरफ हम रंगों से खेलने का मन बना बैठे है वही दूसरी तरफ शुरू  हो चूका है सियासत का गहरा रंग |जी हाँ हम बात कर रहे है अचानक से हुई इस राजनितिक उथल पुथल की , बैसाखी के सहारे चलने वाली इस कांग्रेस सरकार की बैसाखी हिलती और छिनती नजर आ रही है | डी.म.के. प्रमुख करूणानिधि के नए पैतरे  ने राजनीती में एक नया रंग डाल दिया है, तमिल मुद्दे को लेकर समर्थन वापसी का एलान कर चुके करूणानिधि ने सरकार को सकते में डाल दिया है | इस सदमे को झेल रही सरकार के लिए एक और झटका तब लगा जब बहार से समर्थन दे रही मुलायम सिंह जी की पार्टी ने कांग्रस के मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बयान को लेकर बेनी प्रसाद से इस्तीफे की मांग कर दिया और उनकी बात नहीं मानने पर समर्थन वापसी की धमकी भी दे  डाली है | गौरतलब है की बेनी बाबु ने मुलायम सिंह जी को लुटेरा और आतंकवादी  जैसे शब्दों से अलंकृत कर दिया  था , और इसी बात से चुप्पी साढ़े मुलायम ने अचनक मौके को भांप कर एक नया सियासी रंग डाल दिया |
             जुगार वाली कांग्रेस सरकार के लिए अब सर दर्द जैसी स्थिति  दिखाई दे रही है. और सरकार ने जुगार वाला अपना काम  शुरू  भी  कर दिया है, श्रीमती सोनिया गाँधी मुलायम सिंह के सामने हाथ जोड़ते नजर आ रही थी की शायद मुलायम सिंह ही बेडा पाड़ लगा दे | और राजनीती के माहिर मुलायम सिंह इस बात को अच्छे तरीके से समझ चुके है की कांग्रेस सरकार पहले ही ममता बनर्जी का साथ खो चुकी है और अब करूणानिधि भी  कन्नी काटते नजर आ रहे है तो  उन की भूमिका महत्वपूर्ण    हो गई है |
बसपा की मायावती ने कांग्रेस को  समर्थन दिए रखने का भरोसा देकर अपाहिज होने से बचाने  की  उम्मीद और कोशिश जारी  रखी है   क्योकि मायावती को हमेशा सीबीआई का खौफ दिखाया जाता रहा है और सरकार का यही एक मजबूत और जबरदस्ती वाला तरीका है अपनी बात मनवाने का |
और आज की सुबह हुआ भी वही करूणानिधि के बेटे के यहाँ सीबीआई की छापेमारी ने यह साबित कर दिया है की समर्थन वापस लेने पर क्या क्या नुकसान झेलना पर सकता है करूणानिधि जी को और साथ ही साथ यह एक चेतावनी भी लगती है मुलायमसिंह जी और मायावती जी के लिए |
इतने घोटाले और भ्रस्ताचार के बाद कांग्रेस की जो साख गिरी है उसे बचनेके लिए और अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए ये लंगरी सरकार किसी  भी  हद तक जा सकती है |
कभी कभी राहत देने वाली बात ये नजर आती है की जेद्यु सरीखी पार्टिया जो बीजेपी की सहयोगी पार्टी है कांग्रेस का दामन बचाने जैसे इशारे करती नजर आती है , खैर जो भी हो जोड़ जुगार जारी है देखते है की डूबता हुआ जहाज को  कौन तिनके की सहारा  देता है या सरकार एक गहरी और अंतिम दुबकी लगाने के कगार पर है ? फैसला जो भी हो लेकिन मार  तो जनता ही खाती है इन सियासी रंगों का | आइए हम सब अपनी होली खेले और राजनीती में भी  सियासी रंग चढ़ने दे और टकटकी लगाए इंतजार करे |
जय भारत
रणजीत

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