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शुक्रवार, 22 मार्च 2013

बिहारी के 101 साल


बिहारी के १०१ साल
दोस्तों आज से १०१ साल पहले हम बिहारी नहीं बंगाली हुआ करते थे I २२ मार्च का दिन हम सभी १० करोड़ बिहारियों के लिए बहुत खास है हमारी एक पहचान बनी बिहारी  होने की पहचान I हमारा यह राज्य देश के भौगोलिक पटल पर बारहवी स्थान  रखता है I हमारे इस भूमि ने एक से एक महान लोगो को अपना नाम दिया है , गौतम बुद्ध,  महावीर, सीता ,जैसे महापुरुष और महादेवी यही हुए इसके अलावा वीर कुवंर सिंह, रामधारी सिंह दिनकर विद्यापति राजेंद्र प्रसाद  जैसे ऐसे अनेको नाम है जिनसे हमारे बिहार का नाम रौशन हुआ है I और क्रांतिकारियों के इतिहास में जय प्रकाश नारायण को भुला नहीं  जा सकता जिसकी वजह से हमे ढेर सारे राजनेता और समाजसेवी मिला I
लेकिन दुर्भाग्य हमारा हमे २००० इसवी में फिर से बाँट दिया गया और हमसे झारखण्ड अलग हो गया फिर भी  हम उसे अपना भाई ही समझते है I बरौनी रिफाइनरी जैसे उद्योग पुरे देश को तेल की सुविधा देता आ रहा है I
               हमारा बिहार शिक्षा के मामले में जरुर निम्न स्तर पर है लेकिन यह भी एक सत्य है की सिविल सेवा में सबसे ज्यादा सफलतम कैंडिडेट देने वाला राज्य भी बिहार ही है I
खैर ज्ञान की बाते तो होती ही रहेंगी आए हुम कुछ चर्चा अपने संस्कृति विविधताओं का भी कर ले -:
हम अपने मिथिला पेंटिंग को लेकर हमेशा से गर्व करते आ रहे है और करते रहेंगे , हमारा भोजपुरी रंग भी किसी  से छुपा नहीं है हम अपने त्यौहार की ख़ुशी पुरे दिल से मनाना जानते  है चाहे होली हो या दीवाली  दुर्गा पूजा हो या छठ पूजा हम हर पल को बखूबी और दिल से जीना जानते है I हमारा बिहार ही एक ऐसा राज्य है जहा हर जिला की अपनी विवधताओ से भरी भाषा है और सबसे मजेदार बात ये है की हम सब एक दुसरे की बातो को आसानी से समझ भी लेते है I बिहार में भारत का हर रंग है
                                                                                                     B- BHARAT
                                                                                                     I-  INDIA
                                                                                                     H- HINDUSTAAN
                                                                                                     A- ARYAVART
                                                                                                     R- REVA
और आज का वक़्त है तो बस ख़ुशी मनाने का क्योकि हमारा अस्तित्व भी आज ही के दिन बना है यानि होली के आसपास इसलिए हमारा राज्य अनेक प्रकार के रंगों से भरा है तो आइए हम पने राज्य के उज्वल भविष्य की कामना करें और लगन से मेहनत करें ताकि हमारा राज्य हर मामले में सबसे आगे जाए और दुनिया में अपना परचम लहराए I
जय बिहार
रणजीत

गुरुवार, 21 मार्च 2013

होली में सियासी रंग



होली में सियासी रंग
होली की रंग में जहां एक तरफ हम रंगों से खेलने का मन बना बैठे है वही दूसरी तरफ शुरू  हो चूका है सियासत का गहरा रंग |जी हाँ हम बात कर रहे है अचानक से हुई इस राजनितिक उथल पुथल की , बैसाखी के सहारे चलने वाली इस कांग्रेस सरकार की बैसाखी हिलती और छिनती नजर आ रही है | डी.म.के. प्रमुख करूणानिधि के नए पैतरे  ने राजनीती में एक नया रंग डाल दिया है, तमिल मुद्दे को लेकर समर्थन वापसी का एलान कर चुके करूणानिधि ने सरकार को सकते में डाल दिया है | इस सदमे को झेल रही सरकार के लिए एक और झटका तब लगा जब बहार से समर्थन दे रही मुलायम सिंह जी की पार्टी ने कांग्रस के मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बयान को लेकर बेनी प्रसाद से इस्तीफे की मांग कर दिया और उनकी बात नहीं मानने पर समर्थन वापसी की धमकी भी दे  डाली है | गौरतलब है की बेनी बाबु ने मुलायम सिंह जी को लुटेरा और आतंकवादी  जैसे शब्दों से अलंकृत कर दिया  था , और इसी बात से चुप्पी साढ़े मुलायम ने अचनक मौके को भांप कर एक नया सियासी रंग डाल दिया |
             जुगार वाली कांग्रेस सरकार के लिए अब सर दर्द जैसी स्थिति  दिखाई दे रही है. और सरकार ने जुगार वाला अपना काम  शुरू  भी  कर दिया है, श्रीमती सोनिया गाँधी मुलायम सिंह के सामने हाथ जोड़ते नजर आ रही थी की शायद मुलायम सिंह ही बेडा पाड़ लगा दे | और राजनीती के माहिर मुलायम सिंह इस बात को अच्छे तरीके से समझ चुके है की कांग्रेस सरकार पहले ही ममता बनर्जी का साथ खो चुकी है और अब करूणानिधि भी  कन्नी काटते नजर आ रहे है तो  उन की भूमिका महत्वपूर्ण    हो गई है |
बसपा की मायावती ने कांग्रेस को  समर्थन दिए रखने का भरोसा देकर अपाहिज होने से बचाने  की  उम्मीद और कोशिश जारी  रखी है   क्योकि मायावती को हमेशा सीबीआई का खौफ दिखाया जाता रहा है और सरकार का यही एक मजबूत और जबरदस्ती वाला तरीका है अपनी बात मनवाने का |
और आज की सुबह हुआ भी वही करूणानिधि के बेटे के यहाँ सीबीआई की छापेमारी ने यह साबित कर दिया है की समर्थन वापस लेने पर क्या क्या नुकसान झेलना पर सकता है करूणानिधि जी को और साथ ही साथ यह एक चेतावनी भी लगती है मुलायमसिंह जी और मायावती जी के लिए |
इतने घोटाले और भ्रस्ताचार के बाद कांग्रेस की जो साख गिरी है उसे बचनेके लिए और अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए ये लंगरी सरकार किसी  भी  हद तक जा सकती है |
कभी कभी राहत देने वाली बात ये नजर आती है की जेद्यु सरीखी पार्टिया जो बीजेपी की सहयोगी पार्टी है कांग्रेस का दामन बचाने जैसे इशारे करती नजर आती है , खैर जो भी हो जोड़ जुगार जारी है देखते है की डूबता हुआ जहाज को  कौन तिनके की सहारा  देता है या सरकार एक गहरी और अंतिम दुबकी लगाने के कगार पर है ? फैसला जो भी हो लेकिन मार  तो जनता ही खाती है इन सियासी रंगों का | आइए हम सब अपनी होली खेले और राजनीती में भी  सियासी रंग चढ़ने दे और टकटकी लगाए इंतजार करे |
जय भारत
रणजीत

रविवार, 17 मार्च 2013

बिहार की अधिकार यात्रा


बिहार की अधिकार  यात्रा है  कल  देश  की  राजधानी  नयी  डेल्ही  में . लाखो  लोग  जोश  के  साथ  इस  यात्रा  में  शामिल  हो  रहे  है . डेल्ही  के   रामलीला  मैदान  में  अच्छी   तैयारी  की  गई  है . बिहार  भवन  खचाखच  भरा  हुआ  है  . मुद्दा  है  बिहार  को  विशेष  राज्य  का  दर्जा  दिया  जाए . हम  सब  इस  मुद्दे  पर  साथ  है . लेकिन  साथ  ही  सुरु  हो  गई  है  राजनीती  का  खेल . गौर  करने  वाली  बात  ये  है   की  बिहार  की  अधिकार  यात्रा  सब  की  है  . फिर  नितीश  कुमार  ही  क्यू ? सिर्फ  जदयू  ही  क्यू ? आखिर  बीजेपी  भी  तो  उनकी  सहयोगी  पार्टी  है  तो  वो  इस  यात्रा  में  क्यू  शामिल  नही   हुए ? जब  बिहार  के  अधिकार  की  बात  है  तो   कांग्रेस  राजद  जैसी  पार्टिया  भी  आगे  आनी  चाहिए  थी  लेकिन  बिहारियों  की  भीड़   को  जदयू  का  ही  पैजामा  पहना  कर  डेल्ही  लाया  जा  रहा  है . क्या  नितीश  कुमार  अपनी  शक्ति  प्रदर्शन  कर  रहे  है ?  क्या  वो  नरेन्द्र  मोदी  को  चुनौती  दे  रहे  है  ? बिहार  की   या  ये  कहे  की  जदयू  की  रैली  की  शोर  और  हलचल  को  देख  कर  क्या  बीजेपी  में  सबकुछ  ठीक  चल  रहा  होगा  ?
मुद्दा  विकास   का  है   और  हम  बिहारी  सब  एक  जुट  है  क्या  यही  एक  मात्र  सच  है ? जी  नहीं  दूसरी  तरफ  का सच  कुछ  और  ही  है  जहा  बिहार  के  विशेष  राज्य  का  दर्जा  मांगने  वालो  की  भीड़ है  वही उस भीड़ में  कुछ  मुट्ठी  भर  लोग  एक  नए राज्य  की  भी  मांग  कर  रहे  है . मिथिला  रज्य . इस  वजह  से  इस  अधिकार  यात्रा  का  बहिष्कार  करने  की  भी  तैयारी  है  . सवाल  ये  है  की  क्या  बिहार  में  मिथिलांचल  के  लोगो  की  उपेक्षा  हो  रही है  ? आखिर  पिछड़े   हुए  बिहार  को   टुकरे  कर  के  और  पिछड़ा    क्यू  कर  रहे  है ? क्या  मिथिला  राज्य  बन  जाने  से  मिथिला - डेल्ही  बन  जाएगी  या  विकाश  के  रास्ते   पर  दौर  परेगी  ? जी  नहीं  बिहार  और  भी  पीछे,   और  मिथिला  एक  पेड़  से  कट  कर  एक  छोटा  सा  पौधा  मात्र  रह  जाएगा  जिसका  विकास   होना  उतना  ही  मुश्किल  होगा  जितना  कछुए  के  लिए  बहुत  तेज  दौर  पाना .
लेकिन  कल  का  वक़्त  है  तो  बस  अपने  नए  सपनो  के  बिहार  को  हकीक़त  में  बदलने  के  लिए  एक  जोरदार  संघर्ष की , जिसमे  हम  सभी  बिहारियों  को  साथ  होना  चाहिए .
जय  बिहार
रणजीत