आखिर और कितनी क़ुर्बानी देखते रहेंगे हम ? दोस्ती के नाम पर दगा और अमन के नाम पर बेशर्मी से भरी कायराना करतूत पाकिस्तान की तो फितरत बन चुकी है | हमारे देश के हुक्मरान बस अपनी हिम्मत बयानबाजी तक ही
सिमित रखते है , चाहे कितने ही निर्दोष सैनिक अपनी जान की आहुति देते रहे इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है | कप्तान कालिया, सुधाकर सिंह हेमराज के बाद फिर से ५ सैनिक की निर्मम हत्या कर दी गयी है और हम है की सबसे ताकतवर होने का खोखला दम भरते रहते है | जरा सोचिए उन मासूमो का क्या होगा जिसने अपना पिता भाई और पति खोया है कौन बनेगा उनका सहारा ? हमारी सरकार तो ५लाख में उनके जान की कीमत लगा देती है लेकिन करोरो अरबो रूपए उन्हें लुटा देती है जो देश के लिए बैट- बाउल से खेलते है | आखिर हमारी बेशर्म सरकार को तो देशभक्ति क़ुर्बानी में नहीं बैट -बाउल में दिखने लगी है | एक कमजोर शासन ने भारत जैसे महान देश की गरिमा को कलंकित कर के रख दिया है |
हर बार पाकिस्तान चाइना जैसे देश हमारे यहाँ शान से सेंधमारी कर जाता है और हम बेबस देखते रहते है | नवाज शरीफ को देख कर बस कारगिल युद्ध की ही स्मृति ताज़ा हो उठती है कही फिर से युद्ध की ही साजिश तो नहीं की जा रही है ? अगर ऐसा है तो शांति के लिए युद्ध भी आवश्यक हो गया है |

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें