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सोमवार, 8 अप्रैल 2013

प्यार की सोच



दोस्तों आज हम जरा प्यार की बाते करते है ज्यादा नहीं थोडा  सा ही करेंगे - हर किसी का प्यार को लेकर अपना विचार होता है जो होना भी चाहिए और सही भी है ! कहते है की प्यार एक एहसास है इसमें उत्साह की मिठास है, गम इसका पहरेदार है , दर्द इसका जोड़ीदार है , और जिसे दर्द का एहसास है प्यार उसी के पास है ! प्यार जब होता है तो अचानक से सबकुछ रंगीन लगने लगता है हर पल एक ही ख्याल और एक ही ख्वाब वो कैसा होगा /होगी और उसके अच्छे अच्छे सपने उस से मिलने की बेचैनी,  उसके गोद में सर रख कर सुख दुःख कहने की दिल से इच्छा ! मतलब एक अपनापन सा एहसास का हो जाना ये सब प्यार के ही तो इशारे है !
                            अब जरा कुछ बातो को सोचिए आपको कोई अच्छा लगता है /लगती है ! आपने  उस से दोस्ती की कुछ दिन की बाते और आपको सबकुछ अच्छा और मीठा मीठा लगने लगता है आपने  सपने देखने शुरू कर दिए, अब बातो में थोडा रोमांस और मजाक का भी सिलसिला शुरू होता है बाते ऐसी होती है जो कभी दिल को गुदगुदाती है तो कभी  दिल को छू जाती है आप अच्छे से उस से जुड़ने  लगते है अब आप उसे हमेशा मिस करने लगते है  शायद ये प्यार ही है और आपके सपने बरक़रार है अभी तक, लेकिन फिर से सोचिए वो पल कैसा होगा जब आपको एक शानदार और जानदार झटका लगे आपने जिसे चाहा उसके प्यार में दिल की जगह अब दिमाग ने जगह ले लिया हो , भावनाओ और एहसास की जगह उसकी तीखी और कडवी बातो ने जगह ले लिया हो, आपको ऐसा सवाल सुन ने को मिलने लगे की ये साबित करो की तुम मेरे से प्यार करते हो , अगर नहीं कर पाए तो इसे  मात्र एक आकर्षण का नाम दिया जाएगा , मतलब ये की अब यहाँ प्यार में दिल नहीं दिमाग लगने लगा, अब प्यार प्यार नहीं एक पढाई लगने लगा क्योकि प्यार में एहसास जुड़ते है वो क्यों जुड़ते  है इसका पता नहीं चल पाता लेकिन जब साबित करने जैसी बात आ जाती है तो प्यार प्यार नहीं एक लेसन लगने लगता है  ! कभी कभी ये भी सुनने को मिल सकता है मेरे लिए प्यार बहुत स्पेशल है मै इसे अभी नहीं करना चाहती /चाहता ! लेकिन यह भी तो एक सच है खास और स्पेशल वो चीज़ होती है जिस से हम दिल से जुड़ते है उसका हमेशा ख्याल रखते है उसकी याद हमेशा आती है , किन्तु वो किताब स्पेशल कैसे हो सकती है जिसे हम कभी पढने की कोशिश ही न करे इस वजह से की ये मेरे लिए खास है और मै इसे अभी नहीं पढना चाहता /चाहती ! ये हास्यास्पद नहीं तो और क्या है ?
           मेरा मानना है की प्यार सिर्फ दिल से हो सकता है दिमाग से नहीं अगर हुआ तो बस एक नए रिश्ते कुछ पल के लिए जुड़ तो जाएँगे लेकिन इतने थियोरेम्स  आएँगे की जिन्दगी  प्रूव करने में ही बीत जाएगी और प्यार एवं रिश्तो का पंचनामा बनते देर नहीं लगेगी ! इसलिए प्यार कीजिए  तो खुश रहने के लिए और वो बस दिल से ही मिल सकता है दिमाग से नहीं !
रणजीत

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